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भारत ……

January 25, 2009

कभी कहता सा लगता है …कि बस अब और नहीं!
अब एक जीवन जी लिया…अब तो मुझे जाने दो…
बहुत से कर्ज उतार लिए , कुछ वायदे भी पूरे किए…
युगों से मूक साक्षी ही तो हूँ…
अब और क्या -क्या दिखाओगे?

तो कभी इठलाता सा ,एक अल्हड़ बच्चे सा कहता है
कि चलो अभी तो बहुत दूर जाना है ..
बस ? अभी थक गए ?
अभी तो कितनें सपनें बाकी हैं ,कितनें ख्वाब संजोनें हैं
कुछ आशाएँ जगानीं हैं ,कुछ बीज नए भी बोने हैं…

कभी पलटकर कहता है
यशस्वी होने का वरदान देकर स्वयं ही अयशस्वी बनाते हो?
यह कैसा वरदान? यह कैसी कामना?

भारतीय जन्में हो तो कुछ कर भी दिखाओगे?
या बस यूँ ही ॐघते ॐघते जीवन बिताओगे?

कहतें तो बहुत हैं ,कहने में क्या जाता है ?
शब्दों का मोल रद्दी के भाव बिक जाता है..

यदि सच में ज्वाला जागी है और कुछ करने की ठानी है
तो व्यर्थ शब्दों के बाण न छोड़ो ,यह तो बहता पानी हैं…

यूँ स्तंभित सा खड़ा भारत ,अपनी किस्मत को कोसता है
उस दिन जन्म क्यों दिया ?बस यही मन मे सोचता है

कहता है मुझसे पूछ कर तो देखो ,मैं सत्य ही बताॐगा
कभी किसी से भेद किया हो, तो अभी प्राण त्याग चला जाॐगा

मेरी बाँहें तो सदियों से खुलीं हैं ,
फिर तुम्हारी आँखें क्यों शक में धुलीं हैं..?

शत्रु ,बागी ,मित्र सभी को दामन में सँभाला है ,
तुमको भी तो ,यहीं ,इसी आँचल में पाला है…

मुझे माता ,पिता ,संत की व्यर्थ उपाधि न दो
मैं जो भी हूँ ,परन्तु तुम्हें जरा सी ग्लानि तो हो..

जिनके साथ कभी खाया था ,उन्हीं के घर जलाते हो ?
अब यूँ घूम घूम किस मानवता पर इठलाते हो ?

कर सको तो बस इतना करो कि मुझे चैन से जीने दो ..
जो घाव तुमने दिए ,उन्हें भी तो सीने दो …

नहीं चाहिए धन ,न चाहिए ‘शक्तिशाली’ की उपाधि
ऐसा करते करते ही तो न बना दोगे मेरी समाधि?

मुसलमान ,हिंदु ,सिख ,ईसाई तो मुझ से क्या काम?
जो बेनाम हो ,वही अधिकारी कि ले मेरा नाम….

भविष्य के सपने देखते ,अतीत की बातें करते हो
इतनी शर्म क्यों ? क्या सच्चाई से डरते हो?

भ्रष्टाचार,हिंसा,गरीबी क्या ये तुम्हारा हिस्सा नहीं ?
या घर से निकलते हुए सोचते हो ,”चलो कोई और सही”?

गरीबी मिटानी है तो पहले दलदल में उतरना सीखो…

परंपरा की चादर ओढ़े कभी चल न पाओगे
सब पीछे छोड़ जाएँगे और देखते रह जाओगे…

पर परंपरा को ऐसे मत फेकना कि कभी मिल न पाए
तुम जैसे कितने परंपरावादी आए और चले गये…

न बनो परंपरा के आलोचक ,न बनो परंपरा के पेहरेदार,
जी सकते हो तो जीओ ,जीवन और सदाचार…

देवियों की उपासना ..और बेटियों को तुच्छ समझते हो
इस बेटा बेटी की उहापोह में व्यर्थ क्यों उलझते हो?

बेटे तो बहुत देखे ‘किरन’ सा दिखाओ तो जानूँ ,
कोई बेटा हो उससे साहसी ,तो मै भी मानूँ…

बेटा बेटी दोनों ही है प्रकृति का वर्दान्
मारनेवाले तुम कौन ? क्या हो भगवान्?

बेटी को तुच्छ न समझो ,न समझो बेटे को राजकुमार…
दोनो के है समान हक दोनो पर न करो अत्याचार….

लूट ,खसोट ,तोड़ फोड़ ,हत्या ..क्या यही है स्वतन्त्रता की परिभाषा?
मै भारत हूँ ,क्या न होगी मुझे ज़ऱा भी हताशा?

गान्धी , नेहरु ,पटेल ने क्या यही सपने सन्जोए थे?
और इसीलिए सैंकड़ों ने प्राण दे, आज़ादी के बीज् बोए थे?

मेरा भारत क्या है ?

एक खूबसूरत ख्वाब..
बोलने की आजादी..
भाषाऒ का मेल…
परंपराऒ का मिलन…
संघर्ष करने की प्रेरणा….
आजादी का बिगुल….
अनेकता में एकता….
मनुष्य की कल्पना..
बहुत से उसूल ….
ढेर सारे सिद्दांत….
अन्याय से मुक्ति…
धर्मो का संगम..
कई वतनों की खुशबू…
एक गीत सुरीला…
एक मनमोहक धुन…
युगों का मेल ….
अपनेआप में कई संसार समेटे हुए….
अनूठा भारत ,अलबेला भारत….
इठलाता भारत….
तिरंगा भारत….

भारत ,हिन्दुस्तान् ,India ……….
गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ…..


CITATION
”On the eve of the Republic Day of our country, I take this opportunity to present this award to my blogger friends who have made a difference by writing their frank opinions in their blogs as well, as in the comment columns of other blogs. These bloggers have not written any sensational or luscious stories to attract traffic to their blogs, but they have put down in prose as well, as verse, whatever they have felt strongly about, may it be about their personal lives or about a burning issue of the society. The sole purpose of their writing has been to make a difference. I wish that their ideas may fructify and bring a change in the society for better. I salute them all.”

An award from Balvinder Sir comes my way…
An award that Sir has crafted himself.He has very graciously bestowed it upon some bloggers..including yours truly…:)Investiture Ceremony and all.:))
And coming from someone who knows what it is like to be in the Olive Greens ,this award is extra special to me …hence the pride of place at the top…:)
The passion and the pride is visible not only in the picture but also in the citation that Balvinder Sir has so beautifully written.Thank you sir,Truly and deeply honoured..
And what a better and more glorious day than today to thank you for this honour…..:)Thank you…:)

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5 Comments leave one →
  1. Sagarone permalink
    January 26, 2009 3:46 am

    Your passion shines through your words. I am presuming that this is your original work since you have not attributed it to anyone as far as I can see.

  2. Usha Pisharody permalink
    January 26, 2009 4:36 am

    Read through the poems. Awfully brilliant, what litte I did understand..

    These lines:
    भविष्य के सपने देखते ,अतीत की बातें करते हो
    इतनी शर्म क्यों ? क्या सच्चाई से डरते हो?

    Finally this is the bottom line with those who hurt India! The do not accept, they do not listen to the inner voice of humanity, they fear the most, and so they dominate, or try to!

    Congrats on the award!

    And yes, loved these lines from the second verse:

    युगों का मेल ….
    अपनेआप में कई संसार समेटे हुए….

    🙂

  3. Indyeah permalink
    January 26, 2009 6:09 am

    Sagarone:-thank you so much..:)..yes,it is my work..and your words have encouraged so much..:)

    Usha Pisharody:-Thank you so much…:)hugss!!!you want to know why?because I love my country right now…you just gave me a reason!:)here I am …in a different city..and .there you are…in god’s own country..:)we have so much in common…backgrounds….thoughts…expressions…and English to interact in!:)and yet we have different languages…..and YET we try to understand what it is that the other is trying to say…as you did with this post….:)hugsss!!!you made me smile..:)a lot!!:)and THANK YOU!!

  4. Solilo permalink
    January 26, 2009 9:49 am

    Abhi, Are you for real? How do you weave your words so well that it touches the reader so well.

    Why don’t you publish your poems? Or have you already?

  5. Indyeah permalink
    January 27, 2009 4:28 am

    Solilo:-awww!!:)Thank you……and thank you…
    there are really good and much better writers out there…:)I am just someone who writes on and off…:)
    But thank you so, so,so much…:)

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