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Ek kavi..

August 31, 2012

(An old draft)

 

 

A poet’s work is to name the unnameable, to point at frauds, to take sides, start arguments, shape the world, and stop it going to sleep
-Salman Rushdie

While researching for an article at the workplace, I came across these lines below.

In every home a burning ghat
In every home a gallows
In every home are prison walls
Colliding against the walls
She falls

– Gorakh Pandey, ‘Band khidkiyon se takrakar’, (She collides against closed windows) 1982

I was fascinated. Intrigued. Who was this poet who could use just a few words so powerfully? Who could paint a picture that loomed large before your eyes. You couldn’t turn away from reality even if you wanted to. He wouldn’t let you. His words wouldn’t.

I started searching for more information about him.

घर घर में

.घर घर में फांसी घर हैं
घर घर में दीवारें हैं
दीवारों से टकरा कर
गिरती है वह
गिरती है आधी दुनिया
सारी मनुष्यता गिरती है
हम जो ज़िंदा हैं
हम सब अपराधी हैं
हम दण्डित हैं.

ध्यान गए बगैर नहीं रहता की गोरख के यहाँ मनुष्यता का यह अलगाव और अपमान जहां सब से अधिक मूर्त है, वह है स्त्री का जीवन. घर भी एक स्वर्ग है जिसे स्त्री ने अपने खून पसीने से बनाया है. लेकिन इसी घर में वह नरक भी है जहाँ वह एक कैदी की तरह जिन्दगी बसर करती है.घर हो चाहे दुनिया हो , स्वर्गों पर काबिज लोगों ने सच्चे निर्माताओं को नरक में डाल रखा है. लेकिन इस नरक के रहते क्या वे खुद भी सुखी रह सकते हैं?क्या वे खुद भी दण्डित नहीं हैं?गोरख की कविता के पास यह दुर्लभ अंतर्दृष्टि है की सत्ता और पितृसत्ता का का व्याकरण एक है, तर्क एक है और नियति भी एक है LINK

पितृसत्ता = Patriarchy

————————————————————————-

उनका डर / गोरख पाण्डेय

वे डरते हैं

किस चीज़ से डरते हैं वे

तमाम धन-दौलत

गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद ?

वे डरते हैं

कि एक दिन

निहत्थे और ग़रीब लोग

उनसे डरना

बंद कर देंगे ।

———————————————————
Danga(Riot)

Is saal danga bahut hua, bahut hui hai khoon ki baarish,
agale saal acchi hogi fasal matdaan ki ….
-Gorakh Pandey

( This time the riot was massive, horrific.
It rained tears and blood.
Next year there will be a good harvest.
A harvest of votes.)
———————————————————-

The Rebel

It’s thousands of years old
their anger
thousands of years old
is their bitterness
I am only returning their scattered words
with rhyme and rhythm
and you fear that
I am spreading fire.

– Gorakh Pandey.
The English translation by Rahul Pandita.
———————————————————————————————-
सोचो तो

सोचो तो मामूली तौर पर जो अनाज उगाते हैं
उन्हें दो जून अन्न ज़रूर मिलना चाहिए
उनके पास कपडे ज़रूर होने चाहिए जो उन्हें बुनते हैं
और उन्हें प्यार मिलना ही चाहिए जो प्यार करते हैं
मगर सोचो तो यह भी कितना अजीब है कि
उगाने वाले भूखें रहते हैं
और उन्हें पचा जाते हैं,
चूहे और बिस्तरों पर पड़े रहने वाले लोग
बुनकर फटे चीथडों में रहते हैं,
और अच्छे से अच्छे कपडे प्लास्टिक की मूर्तियाँ पहने होती हैं
गरीबी में प्यार भी नफरत करता हैं
और पैसा नफरत को भी प्यार में बदल देता है.

-गोरख पांडेय
———————————————————————————–

<

Hille le jhakjhor duniya
janta ki chale paltaniya
deh gae rajwade deh gae maharajwa
rani kari dhool mein lutaniya
hille le Asia re hille le Amrikwa
hille poori jagat ki janataaa
.

-Gorakh Pandey

Pandey wrote revolutionary songs in Bhojpuri hoping to reach out to the peasants, and he did — his songs were sung by them, a rare honour for any contemporary poet.

Yet, his songs were not merely a manifestation of his deep feeling for the movement, but also an expression of a political philosophy which he had imbibed from this struggle. He not only depicted the miseries of the peasants, but also upheld their determined fighting resolve and unequivocally condemned the imperialist feudal combination which, he was convinced, perpetuated this inhuman state of affairs LINK

समझदारों का गीत

हवा का रुख कैसा है, हम समझते हैं
हम उसे पीठ क्यों दे देते हैं, हम समझते हैं
हम समझते हैं ख़ून का मतलब
पैसे की कीमत हम समझते हैं
क्या है पक्ष में विपक्ष में क्या है, हम समझते हैं
हम इतना समझते हैं
कि समझने से डरते हैं और चुप रहते हैं.

चुप्पी का मतलब भी हम समझते हैं
बोलते हैं तो सोच-समझकर बोलते हैं
बोलने की आजादी का
मतलब समझते हैं
टुटपुंजिया नौकरी के लिए
आज़ादी बेचने का मतलब हम समझते हैं
मगर हम क्या कर सकते हैं
अगर बेरोज़गारी अन्याय से
तेज़ दर से बढ़ रही है
हम आज़ादी और बेरोज़गारी दोनों के
ख़तरे समझते हैं
हम ख़तरों से बाल-बाल बच जाते हैं
हम समझते हैं
हम क्यों बच जाते हैं, यह भी हम समझते हैं.

हम ईश्वर से दुखी रहते हैं अगर वह सिर्फ़ कल्पना नहीं है
हम सरकार से दुखी रहते हैं कि वह समझती क्यों नहीं
हम जनता से दुखी रहते हैं क्योंकि वह भेड़ियाधसान होती है.

हम सारी दुनिया के दुख से दुखी रहते हैं
हम समझते हैं
मगर हम कितना दुखी रहते हैं यह भी
हम समझते हैं
यहां विरोध ही बाजिब क़दम है
हम समझते हैं
हम क़दम-क़दम पर समझौते करते हैं
हम समझते हैं
हम समझौते के लिए तर्क गढ़ते हैं
हर तर्क गोल-मटोल भाषा में
पेश करते हैं, हम समझते हैं
हम इस गोल-मटोल भाषा का तर्क भी
समझते हैं.

वैसे हम अपने को
किसी से कम नहीं समझते हैं
हर स्याह को सफेद
और सफ़ेद को स्याह कर सकते हैं
हम चाय की प्यालियों में तूफ़ान खड़ा कर सकते हैं
करने को तो हम क्रांति भी कर सकते हैं
अगर सरकार कमज़ोर हो और जनता समझदार
लेकिन हम समझते हैं
कि हम कुछ नहीं कर सकते हैं
हम क्यों कुछ नहीं कर सकते
यह भी हम समझते हैं.
ENGLISH TRANSLATION by Amitabh Bachchan HERE)

A poet is an unhappy being whose heart is torn by secret sufferings, but whose lips are so strangely formed that when the sighs and the cries escape them, they sound like beautiful music… and then people crowd about the poet and say to him: “Sing for us soon again;” that is as much as to say, “May new sufferings torment your soul.” ~Soren Kierkegaard

Related link

How Socialism will return-aspects of Indian Politics- Gorakh Pandey

PS:- I do not subscribe to the poet’s ideology .The fascination with his words remains.

6 Comments leave one →
  1. August 31, 2012 9:27 pm

    Powerful poetry!!

  2. September 5, 2012 8:38 pm

    I have not been able to appreciate the Hindi poems as much as I would like too… but yes, it is powerful, as IHM has said!

  3. Solilo permalink
    September 9, 2012 6:58 pm

    I love Hindi poetry.

    That reminds me. Abhi, it’s high time you gift me more Hindi poetry. Ask for my new snail mail address after you shop for me. Mwahahaha.

    me- Shopping??? woh kya hai??🙄 *High alti memory loss ho gaya*:mrgreen:
    muah!! aye aye captain! after all Sols ko promise de diya toh de diya ..phir mein apne aap ki bhi nahin sunti😀

  4. September 14, 2012 3:09 pm

    great lines!

  5. Kavita permalink
    February 20, 2014 1:58 pm

    I think you found the lines in my article, so glad you discovered Gorakh! Kavita Krishnan

Trackbacks

  1. Verse love:) | Consider It Crashed

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